खेल मनुष्य के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। खेल बिना मनुष्य की कल्पना करनी नामुमकिन है। खेल शरीर को स्वस्थ रखनेमें मदद करता है। साथ में पैसे कमाने और नाम कमाने में भी मदद करता है। खेल के जरिये देश का नाम रोशन करनेका गर्व महसूस कर सकते है। भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए खेलना बड़े फक्र की बात है। पर देश का दुर्भाग्य है कि काबिलियत वाले खिलाडी आगे आ नहीं पाते और वो अपना जौहर दिखा नहीं पाते। ऐसा क्या है इस खेल की दुनिया में की खिलाडी आगे बढ़ नहीं पाते?
भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में टेलेंट की कमी नहीं है। पर उस टेलेंट की कद्र भी नहीं है। भारत की राजनीती हर चीज में बिच में आती है। भारत देश एक है मगर धर्म, जाती, प्रदेश, अमीर, गरीब और संगठनों में बटा हुआ है। यही वो मुद्दे है जो खेल में बाधक बनते है। अब सवाल ये उठता है कि इन सब मुद्दों का खेल के साथ क्या तालुक रखते है? भारत में अंग्रेजो के जमानेसे एक खास प्रकारकी व्यवस्था चली आ रही है। भारत में किसी भी कार्यप्रणाली को पायदानों में बांटा गया है। हर चीज उसीके मुताबिक गुजरती है और उसमे ऊपर के मुद्दे अहम रोल निभाते है। और इनमे सबसे बड़ा मुद्दा राजनीती का है।
* खेलों की राजनीती
भारत में हर तरह के खेल खेले जाते है। मगर कुछ ही खेल को बढ़ावा मिलता है। ये सब खेल भारतीय ओलिंपिक संघ की निगरानी में आते है। नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं भारतीय ओलिंपिक संघ के विभाग है। जो अलग अलग खेलो के प्रशिक्षण और काम के विभाग है। इन टुकड़ो के कारन यहाँ राजनीती घुस जाती है। स्टेट लेवल की गेम हो या नेशनल की हो या इंटरनेशनल लेवल की हो, हर विभाग के हेड ये चाहते है कि उनके खेल को ज्यादा महत्व दे और ज्यादा फैसिलिटी दे। फिर इसमें राजनितिक दबाव भी आने लगता है। दबाव से खेल के चयन में समजोता होता है। इसके चलते महत्वपूर्ण खेल को नुकसान होता है।
* खिलाड़ियों के चयन में राजनीती
राजनितिक भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है। इतने बड़े देश में , इतनी बड़ी आबादी में कुछ चुनिंदे लोग नहीं है जो खेलों में काबिले तारीफ प्रदर्शन कर सके? है, काफी लोग है मगर उनको मौका मिलता नहीं है। धर्म, जाती, प्रदेश और राजनीती के मुद्दों पर चयन होता है। खिलाडी को अपने बलबूते के बजाय इन मुद्दों की परीक्षा से गुजरना पड़ता है। चयनकर्ता इन सब मुद्दों से नापतोल करके जो खिलाडी चयन करते है वो हर स्तर पर देश की अगुवाई करते है। इससे ही मालूम चलता है कि खिलाडी का स्तर क्या होगा! प्रदर्शन भी वैसा ही होगा।
ओलिम्पिक जैसे खेल के महाकुंभ में हम एक मेडल पाने के लिए तरस जाते है। राजनीती खेल और खिलाड़ियों को कुचल रही है। ऐसा चलता रहेगा तो आगे खेलों से देश का नाम हमेशा के लिए निकल जायेगा। वो हमारे देश के लिए बड़ी शर्मनाक बात होगी।
भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में टेलेंट की कमी नहीं है। पर उस टेलेंट की कद्र भी नहीं है। भारत की राजनीती हर चीज में बिच में आती है। भारत देश एक है मगर धर्म, जाती, प्रदेश, अमीर, गरीब और संगठनों में बटा हुआ है। यही वो मुद्दे है जो खेल में बाधक बनते है। अब सवाल ये उठता है कि इन सब मुद्दों का खेल के साथ क्या तालुक रखते है? भारत में अंग्रेजो के जमानेसे एक खास प्रकारकी व्यवस्था चली आ रही है। भारत में किसी भी कार्यप्रणाली को पायदानों में बांटा गया है। हर चीज उसीके मुताबिक गुजरती है और उसमे ऊपर के मुद्दे अहम रोल निभाते है। और इनमे सबसे बड़ा मुद्दा राजनीती का है।
* खेलों की राजनीती
भारत में हर तरह के खेल खेले जाते है। मगर कुछ ही खेल को बढ़ावा मिलता है। ये सब खेल भारतीय ओलिंपिक संघ की निगरानी में आते है। नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं भारतीय ओलिंपिक संघ के विभाग है। जो अलग अलग खेलो के प्रशिक्षण और काम के विभाग है। इन टुकड़ो के कारन यहाँ राजनीती घुस जाती है। स्टेट लेवल की गेम हो या नेशनल की हो या इंटरनेशनल लेवल की हो, हर विभाग के हेड ये चाहते है कि उनके खेल को ज्यादा महत्व दे और ज्यादा फैसिलिटी दे। फिर इसमें राजनितिक दबाव भी आने लगता है। दबाव से खेल के चयन में समजोता होता है। इसके चलते महत्वपूर्ण खेल को नुकसान होता है।
* खिलाड़ियों के चयन में राजनीती
राजनितिक भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है। इतने बड़े देश में , इतनी बड़ी आबादी में कुछ चुनिंदे लोग नहीं है जो खेलों में काबिले तारीफ प्रदर्शन कर सके? है, काफी लोग है मगर उनको मौका मिलता नहीं है। धर्म, जाती, प्रदेश और राजनीती के मुद्दों पर चयन होता है। खिलाडी को अपने बलबूते के बजाय इन मुद्दों की परीक्षा से गुजरना पड़ता है। चयनकर्ता इन सब मुद्दों से नापतोल करके जो खिलाडी चयन करते है वो हर स्तर पर देश की अगुवाई करते है। इससे ही मालूम चलता है कि खिलाडी का स्तर क्या होगा! प्रदर्शन भी वैसा ही होगा।
ओलिम्पिक जैसे खेल के महाकुंभ में हम एक मेडल पाने के लिए तरस जाते है। राजनीती खेल और खिलाड़ियों को कुचल रही है। ऐसा चलता रहेगा तो आगे खेलों से देश का नाम हमेशा के लिए निकल जायेगा। वो हमारे देश के लिए बड़ी शर्मनाक बात होगी।




