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बॉलीवुड हीरोइन एमी जैक्सन की हुई हॉलीवुड शो सुपरगर्ल में धमाकेदार एंट्री

     बॉलीवुड की विदेशी हीरोइन एमी जैक्सन साउथ की फिल्मों में हिट होने के बाद बॉलीवुड में भी छा रही है। एमी बहुत ही खूबसूरत कलाकार है। साउथ की सुपर हिट फिल्म आई में एमी को सबने पसंद किया था। अक्षय कुमार के साथ भी उनकी फिल्म आ चुकी है। अब सबकी नजर एमी की आने वाली सुपर हिट फिल्म रोबोट 2.0 पर है। जिसमे वह सुपर स्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार के साथ नजर आएंगी।

सुपरगर्ल को साथ देंगी बॉलीवुड हीरोइन एमी
     सुपरगर्ल सीरीज हॉलीवुड की बड़ी मशहूर टीवी सीरीज है। सुपरगर्ल सुपरमैन की कजिन सिस्टर है। वह अपनी शक्तिओं का उपयोग दुश्मनों को रोकने के लिए करती है। सुपरगर्ल की दो सीजन खत्म हो चुकी है। अभी तीसरी सीजन चालू हो गई है। इस सीजन में एमी जैक्सन को लिया गया है। एमी सैटर्न गृह की रहनेवाली दिखाया गया है। वह पृथ्वी पर सुपरगर्ल को सहायता करती नजर आएगी। सीजन के 7 वे एपिसोड में उसकी धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। एमी बहुत ही शानदार लग रही है। उसका नया कॉस्ट्यूम अभी नही दिखाया गया है।

खेलों में राजनीति और खिलाड़ियों के चयन में राजनीति

     खेल मनुष्य के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। खेल बिना मनुष्य की कल्पना करनी नामुमकिन है। खेल शरीर को स्वस्थ रखनेमें मदद करता है। साथ में पैसे कमाने और नाम कमाने में भी मदद करता है। खेल के जरिये देश का नाम रोशन करनेका गर्व महसूस कर सकते है। भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए खेलना बड़े फक्र की बात है। पर देश का दुर्भाग्य है कि काबिलियत वाले खिलाडी आगे आ नहीं पाते और वो अपना जौहर दिखा नहीं पाते। ऐसा क्या है इस खेल की दुनिया में की खिलाडी आगे बढ़ नहीं पाते?

     भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में टेलेंट की कमी नहीं है। पर उस टेलेंट की कद्र भी नहीं है। भारत की राजनीती हर चीज में बिच में आती है। भारत देश एक है मगर धर्म, जाती, प्रदेश, अमीर, गरीब और संगठनों में बटा हुआ है। यही वो मुद्दे है जो खेल में बाधक बनते है। अब सवाल ये उठता है कि इन सब मुद्दों का खेल के साथ क्या तालुक रखते है? भारत में अंग्रेजो के जमानेसे एक खास प्रकारकी व्यवस्था चली आ रही है। भारत में किसी भी कार्यप्रणाली को पायदानों में बांटा गया है। हर चीज उसीके मुताबिक गुजरती है और उसमे ऊपर के मुद्दे अहम रोल निभाते है। और इनमे सबसे बड़ा मुद्दा राजनीती का है।
* खेलों की राजनीती

भारत में हर तरह के खेल खेले जाते है। मगर कुछ ही खेल को बढ़ावा मिलता है। ये सब खेल भारतीय ओलिंपिक संघ की निगरानी में आते है। नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं भारतीय ओलिंपिक संघ के विभाग है। जो अलग अलग खेलो के प्रशिक्षण और काम के विभाग है। इन टुकड़ो के कारन यहाँ राजनीती घुस जाती है। स्टेट लेवल की गेम हो या नेशनल की हो या इंटरनेशनल लेवल की हो, हर विभाग के हेड ये चाहते है कि उनके खेल को ज्यादा महत्व दे और ज्यादा फैसिलिटी दे। फिर इसमें राजनितिक दबाव भी आने लगता है। दबाव से खेल के चयन में समजोता होता है। इसके चलते महत्वपूर्ण खेल को नुकसान होता है।
* खिलाड़ियों के चयन में राजनीती

राजनितिक भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है। इतने बड़े देश में , इतनी बड़ी आबादी में कुछ चुनिंदे लोग नहीं है जो खेलों में काबिले तारीफ प्रदर्शन कर सके? है, काफी लोग है मगर उनको मौका मिलता नहीं है। धर्म, जाती, प्रदेश और राजनीती के मुद्दों पर चयन होता है। खिलाडी को अपने बलबूते के बजाय इन मुद्दों की परीक्षा से गुजरना पड़ता है। चयनकर्ता इन सब मुद्दों से नापतोल करके जो खिलाडी चयन करते है वो हर स्तर पर देश की अगुवाई करते है। इससे ही मालूम चलता है कि खिलाडी का स्तर क्या होगा! प्रदर्शन भी वैसा ही होगा।

     ओलिम्पिक जैसे खेल के महाकुंभ में हम एक मेडल पाने के लिए तरस जाते है। राजनीती खेल और खिलाड़ियों को कुचल रही है। ऐसा चलता रहेगा तो आगे खेलों से देश का नाम हमेशा के लिए निकल जायेगा। वो हमारे देश के लिए बड़ी शर्मनाक बात होगी।

महिला खिलाड़ियों के साथ हो रहा अन्याय और शोषण

     संस्कृत में मनुस्मृति में कहा गया है कि जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ भगवान बसते है। और जहाँ नारी का अपमान होता है वहाँ से भगवान रुठ जाते है। आज के समय में कोई मुश्किल से विश्वास करेगा ऐसी भव्य संस्कृति पर। विश्व में स्त्री का शोषण एक आम बात है। पढ़े लिखे लोग भी इस सामाजिक कलंक को मिटा नहीं पा रहे है। महिलाओं का शोषण हर जगह होता है। उसका तरीका बदल जाता है। सामाजिक रिवाजों के नाम पर, धर्म के नाम पर, जाती के नाम पर, देश-प्रदेश के नाम पे महिलाओं को यातनाएं भुगतनी पड़ती है। कुछ जगह कम तो कुछ जगह ज्यादा, मगर महिलाओं के साथ अन्याय चालू है। घर परिवार से लेके ऑफिसो में और बड़े पोस्ट पर भी शारीरिक, मानसिक या जातिगत शोषण का भोग बनना पड़ता है। स्त्री को आगे बढ़ने के लिए परिवार से लेके मुकाम तक हर तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता है। मॉडलिंग हो, वकालत हो, डॉक्टरी हो या खेल हो, हर जगह शोषण का भोग बनना पड़ता है। स्त्रिओं को ज्यादातर शारीरिक शोषण का शिकार बनना पड़ता है।
* खेलों में हो रहा शोषण

माँ-बाप का अपनी लड़कियों को खेल सम्बंधी प्रवृतियों में ना भेजने का शीर्ष कारण ये भी है कि वो लोग महिलाओं के प्रति खतरों से भली भांति परिचित होते है। ज्यादातर महिलाओं के खेलों के प्रति भेदभाव किया जाता है। उनका इतना महत्व नहीं होता जितना पुरुषों का होता है। लड़की जब घर से निकलकर खेल में देश का नाम रोशन करती है तब सबकी छाती चौड़ी हो जाती है। पर उस लड़की ने वो मकाम हासिल करने के लिए जो क़ुरबानी दी है वो कम नहीं होती। खेल में भी महिलाओं के साथ धर्म, जाती, प्रदेश के नाम पर भेदभाव होता है। उनका खेल के नाम पर शारीरिक शोषण भी किया जाता है। आये दिन खबर आती रहती है कि कोच ने महिला खिलाड़ियों के साथ शारीरिक शोषण का प्रयास किया हो। या चयन करनेके के लिए उनको ब्लैकमेल करनेका प्रयास किया हो। प्रशिक्षण के नाम पर या खिलाड़ियों को मिलने वाली छात्रवृति के नाम पर उनको मजबूर किया जाता है। खेलों में छोटे कपड़ो में उनको हिस्सा लेना होता है। इसमें उनको शरम आती है पर कुछ नहीं कर पाती। स्त्री बिचारि इन सबका भोग बन जाती है। अगर आवाज उठाती है तो वो दोषी बन जाती है। नहीं उठाती है तो भी उसके साथ गलत चालू रहता है। अच्छी खिलाडी हो मग़र शोषण के विरुद्ध आवाजी उठाती है या मना करती है तो उसको मौका नहीं मिलता। कोई मज़बूरी में शोषण का भोग बनता है तो उसको आगे मौका मिलता है और नही भी।

     स्त्री बेटी होती है। स्त्री प्रेमिका होती है। स्त्री पत्नी होती है। स्त्री माँ होती है। इतने उपकार होने के बावजूद उनका शोषण होता है। जिस समाज में, जिस परिवार में महिलाओं को सन्मान मिलता है, वह तरक्की करता है।

बॉलीवुड के बड़े सितारें अपनी सफलता के लिए इन गुरुओं के आशीर्वाद लेते है

     भारत में प्राचीन काल से गुरु शिष्य की परंपरा चली आ रही है। महान संत कबीरजी कह गए है कि गुरु और गोविंद दोनों खड़े है, किसको लागु पांव। गुरु की बलिहारी ज्यादा है। अतः मनुष्य कोई भी हो उसको गुरु के बिना चलता नही है। लोग कितने भी बड़े क्यों ना हो जाये उनको गुरु का आशीर्वाद चाहिए। बल्कि जितने बड़े लोग होते जाते है उतनी ही उनकी धर्म और धार्मिक गुरुओं के प्रति श्रद्धा बढ़ जाती है। हमारे बॉलीवुड के सितारें भी गुरु बनाने से चुके नही है। वह त्यौहार हो या कोई शुभ प्रसंग हो अपने गुरु का आशीर्वाद लेने पहुँच जाते है। बॉलीवुड के सितारें और उनके गुरु के बारे में जानते है।
* राधे माँ
राधे माँ का असली नाम सुखविंदर कौर है। वह मुंबई में आध्यात्मिक गुरु है। बॉलीवुड के काफी सितारें उनके परम् भक्त है जिनमे निर्देशक सुभाष घई भी आते है। उन्होंने राधे माँ को भक्ति से उठा लिया था। राखी सावंत भी राधे माँ की परम् भक्त है। वह त्यौहार मौके पर राधे माँ से आशीर्वाद लेने पहुँच जाती है।
* राधास्वामी
राधास्वामी का सत्संग भी बड़ा फेमस है। पंजाब से शुरू होकर ये अब देश विदेशो में भी फैल रहा है। हर धर्म के लोग इनको मानते है। हमारे बॉलीवुड के स्टार शाहिद कपूर को इन पर अटूट श्रद्धा है। वह अब वाइफ और बच्चे को लेकर उनके आशीर्वाद लेने पहुँच जाते है।
* सत्य साईं बाबा
सत्य साईं बाबा मुम्बई में स्थित है। उनकी कुछ साल पहले मृत्यु हो गई है। फिर भी लोग उनके दर्शन करने जाते है। सत्य साईं बाबा के भक्तों में ऐश्वर्या राय बच्चन और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर अग्रिम स्थान पर है। ऐश्वर्या को साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा है। वह उनके आशीर्वाद लेने जाया करती है।
* श्री श्री रविशंकर
श्री श्री रविशंकर को गुरूजी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग की खोज की है। वह आध्यात्मिक गुरु है। लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग के जरिये जीवन का उद्देश्य समजाते है। बॉलीवुड में उनके भी कई सारे भक्त है। संजय दत्त को उन पर काफी श्रद्धा है। वह पत्नी मान्यता को लेकर उनके आशीर्वाद लेने पहुँच जाते है।
* ओशो - भगवान् रजनीश
आध्यात्मिक गुरुओं में सबसे अलग नाम आता है ओशो का। उन्होंने हर विषय पर, हर धर्म पर अपने विचार रखे है। ८० के दशक में उनका स्वर्गवास हुआ था। उनके विचार आज भी जिन्दा है और उतने ही सटीक है। उनके विचारों का फैलाव पूरी दुनिया में है। उनके भक्तों में महेश भट्ट आते है। जो उनके विचारों से प्रभावित है।
     बॉलीवुड के सितारों को अपने गुरुओं पर अटूट श्रद्धा को देखते हुए आम जनता भी उनके नक्शे कदम पर चलती है। सितारें अपने धर्म गुरुओं को भगवान की तरह पूजती है और उन पर धन वर्षा करती रहती है।

मेट्रो शहरों में iPhone अब फोन से ज्यादा स्टेटस सिम्बल बन चुका है

     भारत असमानताओं का देश है। देश में हर जगह धार्मिक, जातिगत और आर्थिक असमानता देखने को मिलती है। लोगों की मानसिकता भी ऐसी हो गई है। हर इंसान को अपना स्टेटस बड़ा दिखाना है। महंगे कपड़े, महंगी गाड़ियां और महंगे मोबाइल फोन से लोगों को दूसरों को अपने स्टेटस के बारे में जताना है। कपड़ों पर तो लिखा नही होता है कि कौनसी ब्रांड है और कितने महंगे है। गाड़ी तो चलती रहती है और इंसान अंदर बैठा होता है तो अपना स्टेटस दिखा नही पाता। सिर्फ मोबाइल ही एक ऐसा जरिया है कि इंसान अपना स्टेटस और अमीरी दिखा सकता है।
     आज के जमाने में मोबाइल के बिना जीना असंभव है। युवा वर्ग तो मोबाइल के पीछे पागलो की तरह दौड़ता रहता है। वह हर तरह के मोबाइल ब्रांड और उनकी कीमत जानता है। आज के युग में एप्पल ब्रांड ने धूम मचा रखी है। एप्पल का हर चीज सबसे महंगा और हटके होता है। लोग एप्पल के गैजेट्स को अपना स्टेटस सिंबल समझते है। गांव से ज्यादा मेट्रो जैसे शहरो में तो लोगों ने iPhone को अपना स्टेटस बना दिया है। लोग iPhone को देखते ही इम्प्रेस हो जाते है। मन ही मन में सोचते है कि वाह क्या नसीब वाला है कि iPhone रखता है। युवा पीढ़ी को ज्यादातर महंगे गैजेट्स में रस होता है। अब धीरे धीरे लोग गैजेट्स खरीदने लगे है। अब इसमें भी कौनसी ब्रांड की आइटम है वह जरूरी बन गया है। नौजवान एप्पल की ब्रांड लेकर अपने साथी दोस्तों या सोसाइटी में शान से दिखाते है। हकीकत में लोगों की मानसिकता भी ऐसी हो गई है। सबको अपना स्टेटस सोसाइटी में ऊँचा दिखाना है। iPhone एक ऐसा गैजेट है जो सबके मन की इच्छा को पूर्ण करता है।
     Iphone के फीचर्स लाजवाब है। ऐसा नही है कि दूसरी ब्रांड के मोबाइल इसके आगे कुछ नही होते पर ब्रांड वैल्यू और फोन की क्वालिटी ने सोसाइटी में iPhone की अलग इमेज बनाके रखी है। हर ब्रांड के मोबाइल के अलग अलग फीचर्स होते है। पर स्टेटस सिंबल को सिर्फ iPhone ही बताता है ऐसा मेट्रो जैसे शहरो में चलन हो गया है। लोग उसीको ही अपना स्टेटस समझते है।

बिग बॉस के पिछले सारे सीजन में इन विदेशियों ने धूम मचाई थी

     भारत में कई तरह के रियालिटी शो चलते रहते है। कोई डान्सिंग का होता है तो कोई सिंगिंग का। सबका अपना अलग अंदाज होता है। पर बिग बॉस जैसा कोई शो नही है। इसमें गाना है, डांस है, ड्रामा है, जगड़ा है, प्यार है, नफरत है, दोस्ती है, दुश्मनी है और मनी भी है। लोग इस शो को देखने के लिए पागल हो जाते है। सुबह शाम इस शो की चर्चा करते रहते है। लोगों के प्यार के कारण ही आज बिग बॉस का ११ वां सीजन शुरू होने जा रहा है। ये शो सिर्फ देश में नही विदेशों में भी मशहूर हो गया है। इस शो में दुनिया का नामी स्पर्धकों ने प्रवेश किया हुआ है।

* बिग बॉस १ & २ - पहले शो का नाम बिग ब्रदर था। जिसमें जेड गुडी ने हिस्सा लिया था। बिग बॉस २ में वह फिर से आयी थी पर सर्वाइकल कैंसर होने की वजह से शो छोड़ना पड़ा था।

* बिग बॉस ३ - इस सीजन में जर्मन ब्यूटी क्लाउडिया सिसला ने हिस्सा लिया था। उसके आने से शो में काफी उछाल आया था। प्रवेश राणा के साथ अच्छा तालमेल था।

* बिग बॉस ४ - हॉलीवुड की मॉडल और हीरोइन पामेला एंडरसन ने बतौर गेस्ट मुलाकात ली थी। इसके आने के बाद शो का टाइमिंग बदलना पड़ा था।
* बिग बॉस ५ - ऑस्ट्रेलिया के आल राउंडर क्रिकेटर एंड्रू सिमोंडस ने हिस्सा लिया था। उनके आने से दर्शक खुश हो गए थे। इसी सीजन में सनी लियॉन ने कदम रखे थे। उसकी सुंदरता देख के सब पागल हो गए थे। फिल्म निर्देशक महेश भट्ट ने उनको वही फिल्म का ऑफर दे दिया था।

* बिग बॉस ७ - इस सीजन में भी दो मॉडल एली अवराम और सोफ़िया हयात ने प्रवेश किया था। एली सबको पसंद आयी थी। सोफ़िया ने अरमान कोहली पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी।
* बिग बॉस ९ - ईरान की हिरोइन मंदना करीमी ने कदम रखा था। मंदना काफी विवाद में रही थी। नोरा फतेही ने भी शो में हिस्सा लिया था। दोनों बॉलीवुड की फिल्मों में आज काम कर रही है।

* बिग बॉस १० - एलेना कज़न ने इस सीजन में प्रवेश किया था। एलेना मॉडल और हीरोइन है।

     इस शो के मिर्च मसाले ने काफी लोकप्रियता बटोरी है।

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