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महिला खिलाड़ियों के साथ हो रहा अन्याय और शोषण

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     संस्कृत में मनुस्मृति में कहा गया है कि जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ भगवान बसते है। और जहाँ नारी का अपमान होता है वहाँ से भगवान रुठ जाते है। आज के समय में कोई मुश्किल से विश्वास करेगा ऐसी भव्य संस्कृति पर। विश्व में स्त्री का शोषण एक आम बात है। पढ़े लिखे लोग भी इस सामाजिक कलंक को मिटा नहीं पा रहे है। महिलाओं का शोषण हर जगह होता है। उसका तरीका बदल जाता है। सामाजिक रिवाजों के नाम पर, धर्म के नाम पर, जाती के नाम पर, देश-प्रदेश के नाम पे महिलाओं को यातनाएं भुगतनी पड़ती है। कुछ जगह कम तो कुछ जगह ज्यादा, मगर महिलाओं के साथ अन्याय चालू है। घर परिवार से लेके ऑफिसो में और बड़े पोस्ट पर भी शारीरिक, मानसिक या जातिगत शोषण का भोग बनना पड़ता है। स्त्री को आगे बढ़ने के लिए परिवार से लेके मुकाम तक हर तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता है। मॉडलिंग हो, वकालत हो, डॉक्टरी हो या खेल हो, हर जगह शोषण का भोग बनना पड़ता है। स्त्रिओं को ज्यादातर शारीरिक शोषण का शिकार बनना पड़ता है।
* खेलों में हो रहा शोषण

माँ-बाप का अपनी लड़कियों को खेल सम्बंधी प्रवृतियों में ना भेजने का शीर्ष कारण ये भी है कि वो लोग महिलाओं के प्रति खतरों से भली भांति परिचित होते है। ज्यादातर महिलाओं के खेलों के प्रति भेदभाव किया जाता है। उनका इतना महत्व नहीं होता जितना पुरुषों का होता है। लड़की जब घर से निकलकर खेल में देश का नाम रोशन करती है तब सबकी छाती चौड़ी हो जाती है। पर उस लड़की ने वो मकाम हासिल करने के लिए जो क़ुरबानी दी है वो कम नहीं होती। खेल में भी महिलाओं के साथ धर्म, जाती, प्रदेश के नाम पर भेदभाव होता है। उनका खेल के नाम पर शारीरिक शोषण भी किया जाता है। आये दिन खबर आती रहती है कि कोच ने महिला खिलाड़ियों के साथ शारीरिक शोषण का प्रयास किया हो। या चयन करनेके के लिए उनको ब्लैकमेल करनेका प्रयास किया हो। प्रशिक्षण के नाम पर या खिलाड़ियों को मिलने वाली छात्रवृति के नाम पर उनको मजबूर किया जाता है। खेलों में छोटे कपड़ो में उनको हिस्सा लेना होता है। इसमें उनको शरम आती है पर कुछ नहीं कर पाती। स्त्री बिचारि इन सबका भोग बन जाती है। अगर आवाज उठाती है तो वो दोषी बन जाती है। नहीं उठाती है तो भी उसके साथ गलत चालू रहता है। अच्छी खिलाडी हो मग़र शोषण के विरुद्ध आवाजी उठाती है या मना करती है तो उसको मौका नहीं मिलता। कोई मज़बूरी में शोषण का भोग बनता है तो उसको आगे मौका मिलता है और नही भी।

     स्त्री बेटी होती है। स्त्री प्रेमिका होती है। स्त्री पत्नी होती है। स्त्री माँ होती है। इतने उपकार होने के बावजूद उनका शोषण होता है। जिस समाज में, जिस परिवार में महिलाओं को सन्मान मिलता है, वह तरक्की करता है।
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